Published on: 27 Jul 2026
साप्ताहिक वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ, कुलपति एवं कुलसचिव ने किया पौधारोपण।*
इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर, रेवाड़ी में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के तत्वावधान में आयोजित पौधारोपण सप्ताह का शुभारंभ कुलपति प्रो. असीम मिगलानी एवं कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह ने पौधारोपण कर किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर को अधिक हरित, स्वच्छ एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण एवं जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाना तथा उनका संरक्षण करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों से अपील की कि वे अपने जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ एवं अन्य शुभ अवसरों पर पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि पौधे लगाना जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक आवश्यक उनकी नियमित देखभाल करना है, क्योंकि स्वस्थ वृक्ष ही आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण, शुद्ध वायु एवं सुरक्षित भविष्य प्रदान कर सकते हैं।
इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह ने भी पौधारोपण करते हुए राष्ट्रीय सेवा योजना की सभी इकाइयों द्वारा संचालित इस पर्यावरण संरक्षण अभियान की सराहना की। उन्होंने कहा कि एनएसएस का यह अभियान केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता विकसित करने का एक प्रभावी माध्यम भी है। उन्होंने स्वयंसेवकों से लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल एवं संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान एनएसएस स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर अधिष्ठाता शैक्षणिक मामले के प्रो. सुनील कुमार, छात्र कल्याण विभाग अधिष्ठाता प्रो. करण सिंह, महाविद्यालय मामलों के अधिष्ठाता प्रो. दीपक गुप्ता, वाणिज्य विभाग के अध्यक्ष प्रो. रविंद्र, डॉ. बिरेंद्र कुमार, इतिहास विभाग, डॉ. सुशांत यादव, प्रबंधन विभाग, एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अनीता, डॉ. जयपाल, डॉ. अमनदीप एवं डॉ. संदीप कुमार, एनएसएस के लिपिक मंजीत सहित बड़ी संख्या में एनएसएस स्वयंसेवक उपस्थित रहे।